LegalPost

नागरिक निष्पादन सामान्य जानकारी: अनिवार्य निष्पादन के मुख्य मार्गदर्शन

103 परामर्श मामलों पर आधारित · अपडेट · कोरियाई मूल से अनुवादित।

अनिवार्य निष्पादन में निष्पादन-आधार का प्रभाव, निष्पादन के अधीन संपत्ति की स्थिति, जमा और वितरण के प्रकार तथा निष्पादन-खर्चों के बीच अंतर समझना आवश्यक है। कुर्की, अस्थायी निष्पादन, ऋणी की मृत्यु या ऋण-मुक्ति जैसी परिस्थितियों के अनुसार निष्पादन का दायरा और उसे चुनौती देने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं।

एक नज़र में

पक्षकार → ऋणदाता → ऋणी → तीसरा व्यक्ति → ऋणदाता ऋणी की संपत्ति पर अनिवार्य निष्पादन चाहता है → क्या कुर्की के बाद संपत्ति तीसरे व्यक्ति को दी गई? → हाँ → नहीं → क्या चल संपत्ति ऋणी के कब्जे में है और बाहरी रूप से तीसरे की नहीं लगती? → क्या निष्पादन स्पष्ट रूप से अनुचित और अधिकार का दुरुपयोग है? → हाँ — अनुच्छेद 44 → निष्पादन आगे बढ़ सकता है; उसकी सीमा और खर्च जाँचें → उचित आपत्ति या दावे से निष्पादन को चुनौती दें → कुर्की की सीमा → खर्च और जमा → अस्थायी निष्पादन → हस्तांतरण कुर्की-ऋणदाता के साथ संबंध में प्रभावहीन हो सकता है; कुर्की के समय दावे की सीमा देखें → आवश्यक खर्च ऋणी वहन करता है; बिना प्रतिपूर्ति वाले खर्च की राशि निष्पादन न्यायालय से तय कराएँ → अस्थायी निष्पादन में भुगतान अंतिम तभी है जब निर्णय अंतिम हो; रोक की जमानत में किराये का नुकसान शामिल हो सकता है

मुख्य बातें

  • कुर्की के बाद संबंधित संपत्ति किसी तीसरे व्यक्ति को हस्तांतरित हो जाने पर भी निपटान सभी लोगों के संबंध में अमान्य नहीं होता; कुर्की-ऋणदाता के साथ संबंध में उसका प्रभाव सीमित हो सकता है। मूल मुकदमे में जीतने वाला ऋणदाता, कुर्की-ऋणी को निष्पादन-ऋणी बनाकर निष्पादन कर सकता है (उदाहरण 1)।
  • ऋणी के कब्जे में मौजूद चल संपत्ति को निष्पादन अधिकारी कुर्क कर सकता है, जब तक कि उसके बाहरी स्वरूप से यह स्पष्ट न हो कि वह किसी तीसरे व्यक्ति की है। तीसरा व्यक्ति तृतीय-पक्ष आपत्ति का मुकदमा आदि दायर करके निष्पादन को चुनौती दे सकता है (उदाहरण 4)।
  • अनिवार्य निष्पादन के लिए आवश्यक खर्च ऋणी वहन करता है। निष्पादन-प्रक्रिया में जिन खर्चों की प्रतिपूर्ति नहीं हुई हो, उनके लिए अलग मुकदमा करने के बजाय निष्पादन-खर्च की राशि निर्धारित करने का निर्णय मांगा जा सकता है (नागरिक निष्पादन अधिनियम, अनुच्छेद 53 (민사집행법 제53조), नागरिक निष्पादन नियमावली, नियम 24 (민사집행규칙 제24조); उदाहरण 12, 18)।
  • अस्थायी निष्पादन की घोषणा वाले निर्णय के अनुसार भुगतान की गई राशि को तब तक अंतिम और निश्चित अदायगी नहीं माना जा सकता, जब तक अपील के चरण में निर्णय रद्द या परिवर्तित हुए बिना अंतिम न हो जाए। इसलिए अपील न्यायालय उस भुगतान को ध्यान में रखे बिना यह तय कर सकता है कि दावा उचित है या नहीं (उदाहरण 7)।
  • अस्थायी निष्पादन की घोषणा वाले निर्णय के संबंध में अनिवार्य निष्पादन रोकने के लिए दी गई जमानत, स्थगन के कारण ऋणदाता को हुए नुकसान की गारंटी देती है। जिस अवधि में भवन खाली कराने का निष्पादन स्थगित रहा, उस अवधि के किराये के बराबर नुकसान जमानत के दायरे में शामिल हो सकता है (उदाहरण 16)।
  • यदि किसी पक्ष की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो जाए, तो प्रक्रिया रुक जाती है; लेकिन इस बात पर ध्यान दिए बिना सुनाया गया निर्णय स्वतः अमान्य नहीं हो जाता। विधिवत उत्तराधिकारी को मुकदमा आगे बढ़ाने के अधिकार से वंचित करने वाली प्रक्रियागत अवैधता को अपील या पुनर्विचार के माध्यम से चुनौती दी जा सकती है (नागरिक प्रक्रिया अधिनियम, अनुच्छेद 233 (민사소송법 제233조); उदाहरण 3)।
  • निष्पादन-आधार वाला ऋण होने पर भी, यदि उसके आधार पर निष्पादन स्पष्ट रूप से अनुचित और न्याय के विरुद्ध हो तथा अधिकार के दुरुपयोग की श्रेणी में आता हो, तो दावे पर आपत्ति का मुकदमा दायर करके निष्पादन हटाने की मांग की जा सकती है (नागरिक निष्पादन अधिनियम, अनुच्छेद 44 (민사집행법 제44조); उदाहरण 19, 21)।
  • अंतिम हो चुका पूर्ण-आवंटन आदेश, कुछ मामलों में निष्पादन के अधीन दावे के भविष्य का अनिश्चित दावा होने पर भी, निष्पादन-दावे को समाप्त करने का प्रभाव उत्पन्न करता है। इसलिए भविष्य के दावे के संबंध में पूर्ण-आवंटन आदेश मिलने के बाद निष्पादन-आधार दोबारा जारी कराया जा सकता है या नहीं, इसकी अलग से जांच करनी चाहिए (नागरिक निष्पादन अधिनियम, अनुच्छेद 231 (민사집행법 제231조); उदाहरण 5)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q. यदि कुर्क की गई अचल संपत्ति किसी तीसरे व्यक्ति को बेच दी जाए, तो क्या उस संपत्ति पर अनिवार्य निष्पादन किया जा सकता है?

कुर्की के बाद किया गया निपटान, कुर्की-ऋणदाता के साथ संबंध में प्रभावहीन हो सकता है। मूल मुकदमे में जीतने वाला ऋणदाता, कुर्की-ऋणी को निष्पादन-ऋणी बनाकर कुर्की को मुख्य कुर्की में परिवर्तित करने वाली अनिवार्य निष्पादन-कार्रवाई कर सकता है। निष्पादन का दायरा कुर्की-निर्णय के समय दावे की राशि की सीमा से संबंधित होता है।

मामला 1

Q. यदि निष्पादन अधिकारी केवल यह सुनकर कि ऋणी के कब्जे की वस्तु किसी तीसरे व्यक्ति की है, उसे कुर्क करने से इनकार कर दे, तो क्या करना चाहिए?

जब तक वस्तु के बाहरी स्वरूप से यह स्पष्ट न हो कि वह किसी तीसरे व्यक्ति की है, ऐसे उदाहरण हैं जिनमें केवल ऋणी के कब्जे के आधार पर स्वामित्व का निष्कर्ष निकाले बिना वस्तु कुर्क की जा सकती है। यदि निष्पादन अधिकारी निष्पादन का दायित्व लेने से इनकार करे, तो न्यायालय में आपत्ति दायर की जा सकती है (नागरिक निष्पादन अधिनियम, अनुच्छेद 16(3), 189(1) (민사집행법 제16조 제3항, 제189조 제1항))।

मामला 4

Q. क्या केवल मूलधन और विलंब-क्षतिपूर्ति जमा करने से अनिवार्य निष्पादन रोका जा सकता है?

यदि निष्पादन के खर्चों की प्रतिपूर्ति नहीं की गई है, तो जमा राशि से निष्पादन-आधार में दर्शाया गया ऋण समाप्त हो जाने पर भी निष्पादन-शक्ति को पूरी तरह हटवाना कठिन हो सकता है। हालांकि, ऐसे उदाहरण भी हैं जिनमें कमी बहुत मामूली होने पर सद्भावना के सिद्धांत के आधार पर जमा को वैध माना गया है; इसलिए जमा राशि और निष्पादन-खर्चों, दोनों की जांच करनी चाहिए।

मामला 12

Q. निष्पादन-प्रक्रिया में वापस न मिले निष्पादन-खर्चों का दावा अलग मुकदमे में किया जा सकता है?

उदाहरणों के अनुसार, निष्पादन-खर्चों की वसूली के लिए अलग मुकदमा या भुगतान-आदेश मांगने के बजाय, निष्पादन न्यायालय में निष्पादन-खर्च की राशि निर्धारित करने का निर्णय मांगना चाहिए। उस निर्णय के अंतिम होने के आधार पर ऋणी की संपत्ति पर अनिवार्य निष्पादन किया जा सकता है (नागरिक निष्पादन नियमावली, नियम 24(1) (민사집행규칙 제24조 제1항))।

मामला 18

Q. यदि अस्थायी निष्पादन की घोषणा वाले निर्णय के अनुसार धन का भुगतान किया गया हो, तो क्या अपील न्यायालय निर्णय करते समय उस राशि को घटाता है?

ऐसा भुगतान अंतिम और निश्चित अदायगी न माना जा सकता है, इसलिए अपील न्यायालय भुगतान के तथ्य को ध्यान में रखे बिना यह तय कर सकता है कि दावा उचित है या नहीं। भुगतान का प्रभाव इस बात पर निर्भर कर सकता है कि अस्थायी निष्पादन की घोषणा या मूल मुकदमे का निर्णय रद्द या परिवर्तित हुए बिना अंतिम होता है या नहीं।

मामला 7

Q. क्या अनिवार्य निष्पादन रोकने के लिए जमा की गई जमानत राशि से स्थगन-अवधि के किराये का नुकसान भी वसूल किया जा सकता है?

अनिवार्य निष्पादन को स्थगित करने के लिए दी गई जमानत, स्थगन के कारण ऋणदाता को हुए नुकसान की गारंटी देती है। यदि भवन खाली कराने का निष्पादन विलंबित हुआ हो, तो स्थगन-अवधि के दौरान हुए किराये के बराबर नुकसान इसमें शामिल हो सकते हैं। हालांकि, बताया गया है कि जमानत मूल ऋण की नहीं, बल्कि निष्पादन-स्थगन के कारण हुए नुकसान की गारंटी देती है।

मामला 16

Q. यदि ऋणी की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो जाए और उत्तराधिकारियों के बिना निर्णय सुना दिया जाए, तो क्या वह निर्णय अमान्य है?

मृत्यु के कारण मुकदमे की प्रक्रिया रुक जाती है, लेकिन ऐसे न्यायिक निर्णयों का उल्लेख है जिनके अनुसार इस रुकावट पर ध्यान दिए बिना निर्णय सुना दिया गया हो, तो केवल इसी कारण वह निर्णय स्वतः शून्य नहीं हो जाता। विधिवत उत्तराधिकारी द्वारा मुकदमा आगे बढ़ाने के अधिकार को बाहर रखने वाली प्रक्रियागत अवैधता को अपील या पुनर्विचार के माध्यम से चुनौती दी जा सकती है (नागरिक प्रक्रिया अधिनियम, अनुच्छेद 233 (민사소송법 제233조))।

मामला 3

Q. क्या केवल वचन-पत्र के नोटरीकृत दस्तावेज़ के आधार पर जमानतदार की संपत्ति पर अनिवार्य निष्पादन किया जा सकता है?

जिस वचन-पत्र के नोटरीकृत दस्तावेज़ में अनिवार्य निष्पादन स्वीकार करने का आशय दर्ज हो, वह निष्पादन-आधार बन सकता है। उदाहरण में बताया गया है कि यदि ऋणी भुगतान न करे, तो नोटरीकृत दस्तावेज़ पर निष्पादन-लेख प्राप्त करके जमानतदार की संपत्ति पर भी अनिवार्य निष्पादन किया जा सकता है। हालांकि, यह भी बताया गया है कि नोटरीकृत दस्तावेज़ को निर्णय के समान अंतिम निर्णय-प्रभाव प्राप्त नहीं होता।

मामला 24

Q. क्या ऋण-मुक्ति का निर्णय होने के बाद अंतिम निर्णय आ जाने पर भी दावे पर आपत्ति का मुकदमा दायर किया जा सकता है?

उदाहरण के अनुसार, यदि ऋणी को ऋण के अस्तित्व की जानकारी होते हुए भी उसने ऋणदाता-सूची में उसका उल्लेख नहीं किया था, तो ऐसी स्थिति से अलग मामलों में, मुक्ति का प्रभाव अंतिम निर्णय के बाद निष्पादन-चरण में उठाया जा सकता है। ऐसे मामले में दावे पर आपत्ति का मुकदमा दायर करके निष्पादन हटाने की मांग की जा सकती है।

मामला 19

संबंधित क़ानून

  • नागरिक निष्पादन अधिनियम, अनुच्छेद 16(3) (민사집행법 제16조 제3항)
  • नागरिक निष्पादन अधिनियम, अनुच्छेद 19(3) (민사집행법 제19조 제3항)
  • नागरिक निष्पादन अधिनियम, अनुच्छेद 25(1) (민사집행법 제25조 제1항)
  • नागरिक निष्पादन अधिनियम, अनुच्छेद 31 (민사집행법 제31조)
  • नागरिक निष्पादन अधिनियम, अनुच्छेद 39 (민사집행법 제39조)
  • नागरिक निष्पादन अधिनियम, अनुच्छेद 44 (민사집행법 제44조)
  • नागरिक निष्पादन अधिनियम, अनुच्छेद 52 (민사집행법 제52조)
  • नागरिक निष्पादन अधिनियम, अनुच्छेद 53 (민사집행법 제53조)
  • नागरिक निष्पादन अधिनियम, अनुच्छेद 56(4) (민사집행법 제56조 제4호)
  • नागरिक निष्पादन अधिनियम, अनुच्छेद 61(1) (민사집행법 제61조 제1항)
  • नागरिक निष्पादन अधिनियम, अनुच्छेद 83(1) (민사집행법 제83조 제1항)
  • नागरिक निष्पादन अधिनियम, अनुच्छेद 90 (민사집행법 제90조)
  • नागरिक निष्पादन अधिनियम, अनुच्छेद 176(1) (민사집행법 제176조 제1항)
  • नागरिक निष्पादन अधिनियम, अनुच्छेद 189(1) (민사집행법 제189조 제1항)
  • नागरिक निष्पादन अधिनियम, अनुच्छेद 231 (민사집행법 제231조)

ध्यान दें

  • केवल इस आधार पर कि कुर्की या अंतरिम निषेधाज्ञा मौजूद है, किसी तीसरे व्यक्ति से सीधे बेदखली की मांग या निपटान को अमान्य घोषित करने का दावा नहीं किया जा सकता। मूल मुकदमे के निर्णय का निष्पादन, उत्तराधिकारी के नाम निष्पादन-लेख जारी कराने जैसी आवश्यक प्रक्रियाओं की जांच करनी चाहिए।
  • निष्पादन-आधार में दर्शाए गए ऋण और निष्पादन-खर्चों में अंतर करना चाहिए। ऋण का भुगतान या उसे जमा कर देने के बावजूद, यदि निष्पादन-खर्च बाकी हों, तो निष्पादन-शक्ति पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकती।
  • अस्थायी निष्पादन के आधार पर भुगतान की गई राशि को अपील के चरण में अंतिम और निश्चित अदायगी नहीं माना जा सकता। उदाहरण के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष ऐसे अग्रिम भुगतान की वापसी का आवेदन, जिसके लिए तथ्यों की जांच आवश्यक हो, सामान्यतः स्वीकार्य नहीं होता।
  • नीलामी-प्रक्रिया में किरायेदार जैसे हितधारकों को अधिकारों की सूचना या वितरण की मांग जैसी आवश्यक प्रक्रियाओं की स्वयं जांच करनी चाहिए। ऐसे उदाहरण हैं जिनमें वर्तमान स्थिति की जांच या प्रक्रिया संबंधी सूचना न मिलने के मात्र आधार पर नीलामी-प्रक्रिया की अवैधता का दावा करना कठिन होता है।

स्रोत मामले

यह गाइड कोरिया लीगल एड कॉर्पोरेशन के निम्न परामर्श मामलों (कोरियाई में) से AI द्वारा तैयार की गई है।

  1. 가압류집행 후 부동산 이전 시 가압류의 처분금지적 효력의 범위
  2. 임금채권과 국세체납채권에 의한 압류 경합 시 제3채무자의 공탁 가능 여부
  3. 소송절차 중단을 간과한 판결에 승계집행문을 부여할 수 있는지
  4. 집행관이 유체동산의 집행을 거절할 경우 이의를 제기하는 방법
  5. 장래채권에 대한 압류 및 전부명령 후 판결정본을 재도부여할 수 있는지
  6. 사망한 자를 채무자로 한 담보권실행 경매 시 시효중단 효력 있는지
  7. 가집행선고된 부분을 변제한 경우 항소심에서 이를 참작하는지
  8. 점유이전금지가처분 결정 후 점유한 자를 강제퇴거 시킬 수 있는지
  9. 변제공탁과 집행공탁사유가 동시에 발생한 경우 공탁방법
  10. 체납처분대금 배분시까지 배분요구 안한 임금채권자의 부당이득반환청구권
  11. 가처분등기가 말소된 경우 가처분부동산 매수자의 소유권취득 여부
  12. 집행권원 표시채무는 소멸되었으나 집행비용변상을 안한 경우의 집행력
  13. 선박경매과정에서 발생한 정박료 채권이 선박우선특권에 해당하는지
  14. 보전처분에 관한 본안소송이 계속 중인 경우 보전처분의 완결만으로 권리행사최고 및 담보취소의 요건이 되는 ‘소송완결’이 있다고 ...
  15. 채권자가 확정판결을 받은 채권에 대하여 변제자의 대위권 행사방법
  16. 가집행판결에 대한 강제집행정지 시 공탁한 담보의 피담보채무의 범위
  17. 무효인 공정증서에 기하여 강제집행을 신청한 채권자에게 과실이 있는지
  18. 집행절차에서 변상받지 못한 집행비용을 소송으로 청구할 수 있는지
  19. 면책결정이 내려져 확정 전 채권자가 보증채무 지급청구 소송을 제기하여 면책결정 확정 후 승소 판결을 받았고, 면책 신청 시 채...
  20. 상고심에서 가집행선고로 인한 가지급물반환신청을 할 수 있는지
  21. 확정판결의 집행이 권리남용이 되는 경우의 불복방법
  22. 주택임대차보호법상의 대항요건을 갖춘 임차인은 권리신고를 하지 않더라도 경매절차상 이해관계인이 되는지 여부
  23. 채권자가 재단법인의 기본재산 처분허가신청절차 이행청구를 할 수 있는지
  24. 약속어음공증의 효력
  25. 가압류채권자가 본안소송에서 승소하여 집행권원을 획득하고도 상당한 기간 본집행을 하지 않고 있는 경우, 피보전권리에 대한 보전의...

यह कोरियाई क़ानून की सामान्य जानकारी है, आपके मामले के लिए क़ानूनी सलाह नहीं। किसी विशेष मामले के लिए वकील या कोरिया लीगल एड कॉर्पोरेशन (कोरिया में 132) से संपर्क करें।