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सरकारी कर्तव्यों में बाधा डालने के अपराध: गठन की शर्तों और प्रमुख मुद्दों की मार्गदर्शिका

44 परामर्श मामलों पर आधारित · अपडेट · कोरियाई मूल से अनुवादित।

सरकारी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने का अपराध तब बन सकता है जब कोई सरकारी अधिकारी कानूनी रूप से अपना कर्तव्य निभा रहा हो और उस दौरान उसके साथ मारपीट या धमकी की जाए। छल के माध्यम से सरकारी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने या आधिकारिक चिह्न को निष्प्रभावी करने का अपराध इस बात सहित विशिष्ट परिस्थितियों के आधार पर तय किया जाता है कि क्या कृत्य ने वास्तव में सरकारी अधिकारी के काम या अनिवार्य कार्रवाई के प्रभाव में बाधा डाली।

एक नज़र में

कौन शामिल है → सरकारी अधिकारी → आरोपित व्यक्ति → जाँच या प्रवर्तन एजेंसी → ① अधिकारी के काम में बाधा का आरोप → क्या अधिकारी उस समय विशिष्ट कर्तव्य वैध रूप से निभा रहा था? → हाँ → क्या उस दौरान अधिकारी पर बल या धमकी से बाधा डाली गई? → नहीं → हाँ · धारा 136(1), विशेष चोट पर धारा 144 → कर्तव्य-बाधा का अपराध बन सकता है → क्या छल से वास्तविक काम रुका, या अनिवार्य कार्रवाई का चिह्न निष्प्रभावी हुआ? → हाँ · धारा 137 या 140(1) → दिए तथ्यों से अपराध का निष्कर्ष नहीं निकलता → घटना के समय की वैधता जाँचें → कर्तव्य की वैधता उस समय की परिस्थितियों से तय होती है बाद में बरी होना गिरफ्तारी को अपने आप गैरकानूनी नहीं बनाता → वास्तविक बाधा जाँचें → छल से विशिष्ट वास्तविक काम में बाधा जरूरी है सिर्फ निषिद्ध कृत्य या प्रवर्तन से बचना काफी नहीं → चिह्न और चोट जाँचें → कार्रवाई का प्रभाव सचमुच निष्फल हुआ या नहीं देखें आंशिक भुगतान या बाद में अधिकार नकारना अकेले काफी नहीं खतरनाक वस्तु से अधिकारी घायल हो तो वि…

मुख्य बातें

  • सरकारी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने का अपराध बनने के लिए सरकारी अधिकारी का सामान्य अधिकार ही नहीं, बल्कि उसके द्वारा किया जा रहा विशिष्ट कर्तव्य-निष्पादन भी वैध होना चाहिए (आपराधिक अधिनियम, धारा 136(1) (형법 제136조 제1항))।
  • कर्तव्य-निष्पादन की वैधता का निर्णय कृत्य के समय की विशिष्ट परिस्थितियों के आधार पर वस्तुनिष्ठ और तर्कसंगत रूप से किया जाता है। संबंधित अपराध के लिए बाद में बरी कर दिए जाने मात्र से गिरफ्तारी अपने आप गैरकानूनी नहीं हो जाती (मामला 11)।
  • सरकारी अधिकारी पर हमला करने में न केवल सीधे शारीरिक बल का प्रयोग, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से शारीरिक बल का प्रयोग भी शामिल हो सकता है। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान शोर के मामले में, उसके होने के कारणों और उसकी तीव्रता आदि को समग्र रूप से देखकर निर्णय किया जाता है (मामले 7, 13)।
  • छल के माध्यम से सरकारी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने का अपराध तभी बनता है जब सरकारी अधिकारी को गलत धारणा या भ्रम में डालकर उसके विशिष्ट और वास्तविक कर्तव्य-निष्पादन में बाधा पहुंचाई जाए। सक्रिय रूप से गढ़े गए साक्ष्य से जांच एजेंसी को गलत निर्णय पर पहुंचाने के मामले में यह अपराध बन सकता है (आपराधिक अधिनियम, धारा 137 (형법 제137조); मामले 4, 10, 15)।
  • केवल निषिद्ध कृत्य करना या निगरानी अथवा प्रवर्तन से बचना छल के माध्यम से सरकारी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने का अपराध बनाने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता। यह महत्वपूर्ण है कि क्या काम में सक्रिय रूप से बाधा डालने के लिए ऐसा तरीका अपनाया गया जिसे सरकारी अधिकारी पर्याप्त निगरानी या प्रवर्तन करने पर भी आसानी से नहीं पकड़ सकते थे (मामले 9, 12)।
  • यदि कुर्की या अंतरिम निषेधाज्ञा जैसी अनिवार्य कार्रवाई के चिह्न को हटाया जाए या कार्रवाई के प्रभाव को व्यवहार में निष्फल कर दिया जाए, तो आधिकारिक चिह्न को निष्प्रभावी करने का अपराध विचाराधीन हो सकता है। कुर्की के कुछ लेनदारों को ही भुगतान करने या मुख्य मुकदमे में अधिकार नकारे जाने मात्र से चिह्न का प्रभाव अपने आप समाप्त नहीं होता (आपराधिक अधिनियम, धारा 140(1) (형법 제140조 제1항); मामले 3, 5, 14, 17)।
  • यदि खतरनाक वस्तु का उपयोग करके सरकारी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डाली जाए और कोई सरकारी अधिकारी घायल हो जाए, तो विशेष सरकारी कर्तव्य-बाधा से चोट पहुंचाने का अपराध विचाराधीन हो सकता है। हालांकि, पहले से लगाई गई बाधा को लगाने के समय और इरादे सहित विशिष्ट परिस्थितियों के आधार पर हमला नहीं माना जा सकता (आपराधिक अधिनियम, धारा 144 (형법 제144조); मामला 18)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q. क्या पुलिस के स्वैच्छिक साथ चलने के अनुरोध को अस्वीकार करने या उसका विरोध करने पर सरकारी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने का अपराध बनता है?

स्वैच्छिक साथ चलने के अनुरोध को अस्वीकार किया जा सकता है। इसकी वैधता तभी मानी जा सकती है जब वस्तुनिष्ठ रूप से स्पष्ट हो कि साथ जाना स्वेच्छा से हुआ था। हालांकि, पुलिस का आचरण गैरकानूनी था या नहीं, और विरोध करते समय मारपीट या धमकी दी गई थी या नहीं—इनका निर्णय विशिष्ट परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए।

मामला 1, मामला 19

Q. अगर पुलिस संदिग्ध व्यक्ति की जांच के लिए रास्ता रोकती है और मैं उसे धक्का देता हूं, तो क्या यह सरकारी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने का अपराध है?

पुलिस संबंधित व्यक्ति, संदेह की गंभीरता और पूछताछ की आवश्यकता आदि को ध्यान में रखकर, आवश्यक न्यूनतम सीमा तक उचित तरीके से किसी व्यक्ति को रोक सकती है। ऐसी वैध जांच का बल प्रयोग या धमकी से विरोध करने पर सरकारी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने का अपराध बन सकता है।

मामला 8

Q. अगर बाद में संबंधित आरोप से बरी कर दिया जाए, तो क्या गिरफ्तारी में बाधा डालने के कृत्य के लिए भी दंड नहीं दिया जाएगा?

ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। गिरफ्तारी की वैधता का निर्णय गिरफ्तारी के समय की विशिष्ट परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है। इसलिए, यदि उस समय व्यक्ति को रंगे हाथों पकड़ा गया अपराधी मानने के पर्याप्त कारण थे, तो बाद में बरी किए जाने के बावजूद सरकारी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने का अपराध बन सकता है।

मामला 11

Q. क्या झूठे दस्तावेज़ जमा करने या किसी दूसरे व्यक्ति का रक्त या मूत्र देने पर छल के माध्यम से सरकारी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने का अपराध बनता है?

केवल झूठी सामग्री जमा करने के तथ्य से हर बार अपराध नहीं बनता। हालांकि, यदि कोई दूसरे व्यक्ति का रक्त या मूत्र अपने नाम से जमा करके सक्रिय रूप से साक्ष्य में हेरफेर करता है और जांच एजेंसी के पूरी सावधानी से जांच करने पर भी झूठ का पता लगाना कठिन होने के कारण उसे गलत निष्कर्ष पर पहुंचाता है, तो अपराध बन सकता है।

मामला 4, मामला 10, मामला 15

Q. अगर मैं तेज़ गति से वाहन चलाने की कार्रवाई से बचने के लिए नंबर प्लेट पर परावर्तक पदार्थ छिड़कूं, तो क्या यह छल के माध्यम से सरकारी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने का अपराध है?

उदाहरण में दिए गए न्यायिक निर्णय ने माना कि केवल उस कृत्य के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि व्यक्ति ने छल का ऐसा तरीका अपनाकर प्रवर्तन कार्य में बाधा डाली जिसे पुलिस अधिकारी अपने नियमित कर्तव्यों को पूरी सावधानी से निभाने पर भी पकड़ नहीं सकते थे। केवल निषिद्ध कृत्य करना या प्रवर्तन से बचना छल के माध्यम से सरकारी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने का अपराध बनने के लिए पर्याप्त नहीं है।

मामला 9

Q. अगर प्रदर्शन में स्पीकर बहुत तेज़ बजाया जाए, तो क्या सरकारी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने का अपराध बनता है?

केवल इस कारण कि सभा या प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए तेज़ शोर हुआ, उसे ध्वनि के माध्यम से किया गया हमला नहीं माना जा सकता। हालांकि, यह निर्णय कि क्या किसी सरकारी अधिकारी को पीड़ा पहुंचाने के इरादे से, संचार के उचित दायरे से परे जाकर ध्वनि का इस्तेमाल किया गया था, आवाज़ की तीव्रता, अवधि, दूरी और आसपास की परिस्थितियों को समग्र रूप से देखकर किया जाता है।

मामला 13

Q. कुर्क की गई वस्तु को ले जाने या उसका निपटान करने पर कौन-सा अपराध बन सकता है?

यदि जब्त की गई वस्तु को प्रवर्तन अधिकारी को बताए बिना या उसकी मंज़ूरी लिए बिना काफी दूरी तक ले जाया जाए और इससे प्रवर्तन कार्य अत्यंत कठिन हो जाए, तो आधिकारिक चिह्न को निष्प्रभावी करने का अपराध विचाराधीन हो सकता है। यदि एक ही वस्तु पर कई कुर्कियां हों, तो कुछ लेनदारों को ही भुगतान करने या पक्षों के बीच समझौता होने मात्र से कुर्की का प्रभाव अपने आप समाप्त नहीं होता।

मामला 3, मामला 5

Q. क्या अंतरिम निषेधाज्ञा पाने वाले व्यक्ति के अलावा उसके परिवार का कोई सदस्य या तीसरा व्यक्ति भी निषिद्ध स्थान में प्रवेश करने पर दंडित हो सकता है?

अंतरिम निषेधाज्ञा या किसी अन्य अनिवार्य कार्रवाई का प्रभाव किन लोगों पर लागू होता है, यह आदेश की सामग्री और उसके विषय पर निर्भर करता है। उदाहरण में न्यायालय ने माना कि पति को देनदार बनाकर जारी किए गए प्रवेश-निषेध आदेश का प्रभाव पत्नी पर लागू नहीं होता। निर्माण रोकने के अंतरिम आदेश के मामले में, केवल नाम बदलकर निर्माण जारी रखने के तथ्य से यह नहीं कहा जा सकता कि आदेश के चिह्न का प्रभाव निष्फल हुआ।

मामला 22, मामला 25

Q. अगर सरकारी अधिकारी घायल हो जाएं, तो क्या पहले से बिछाया गया चिकनाई वाला पदार्थ या लोहे की प्लेट भी हमला मानी जाएगी?

उदाहरण में दिए गए न्यायिक निर्णय ने माना कि अधिकारियों के प्रवेश के समय के लिए, उनके अनुपस्थित रहने पर पहले से चिकनाई वाला पदार्थ छिड़क देना, अपने आप में सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध शारीरिक बल का प्रयोग—अर्थात हमला—नहीं माना जा सकता। हालांकि, यदि विशेष परिस्थितियां हों, जैसे कि सरकारी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने के इरादे से अधिकारियों के सामने कोई चीज़ लगाना, तो निर्णय अलग हो सकता है।

मामला 18

संबंधित क़ानून

  • आपराधिक अधिनियम, धारा 20 (형법 제20조)
  • आपराधिक अधिनियम, धारा 21 (형법 제21조)
  • आपराधिक अधिनियम, धारा 136(1) (형법 제136조 제1항)
  • आपराधिक अधिनियम, धारा 137 (형법 제137조)
  • आपराधिक अधिनियम, धारा 140(1) (형법 제140조 제1항)
  • आपराधिक अधिनियम, धारा 142 (형법 제142조)
  • आपराधिक अधिनियम, धारा 144(1) और (2) (형법 제144조 제1항·제2항)
  • पुलिस अधिकारियों के कर्तव्य-निष्पादन अधिनियम, धारा 3 (경찰관직무집행법 제3조)
  • पुलिस अधिकारियों के कर्तव्य-निष्पादन अधिनियम, धारा 6(1) (경찰관직무집행법 제6조 제1항)
  • आपराधिक प्रक्रिया अधिनियम, धारा 85(1) और (3) (형사소송법 제85조 제1항·제3항)
  • आपराधिक प्रक्रिया अधिनियम, धारा 199(1) (형사소송법 제199조 제1항)
  • आपराधिक प्रक्रिया अधिनियम, धारा 200-5 (형사소송법 제200조의5)
  • आपराधिक प्रक्रिया अधिनियम, धारा 213-2 (형사소송법 제213조의2)
  • नागरिक प्रवर्तन अधिनियम, धारा 189(1) (민사집행법 제189조 제1항)
  • आव्रजन नियंत्रण अधिनियम, धारा 81(1) (출입국관리법 제81조 제1항)

ध्यान दें

  • सरकारी अधिकारी का अनुरोध या गिरफ्तारी वैध थी या नहीं, यह कर्तव्य के प्रकार और उस समय की विशिष्ट परिस्थितियों की जांच करके तय किया जाना चाहिए। केवल सरकारी अधिकारी का विरोध करने के कारण सरकारी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने का अपराध नहीं बनता।
  • रंगे हाथों पकड़े गए व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय आरोप के सार और गिरफ्तारी के कारणों आदि की सूचना देनी चाहिए। कुछ मामलों में, यदि पहले बल प्रयोग करना आवश्यक हो, तो व्यक्ति को काबू करने के बाद बिना देरी किए सूचना देना भी आवश्यक होता है।
  • कुर्की या अंतरिम निषेधाज्ञा का प्रभाव समझौते या आंशिक भुगतान मात्र से समाप्त नहीं हो सकता। इसलिए, किसी वस्तु का निपटान करने या उसे स्थानांतरित करने से पहले यह जांच लें कि अनिवार्य कार्रवाई रद्द हुई है या नहीं और उसका प्रभाव क्या है।
  • यह मार्गदर्शिका प्रस्तुत परामर्श मामलों के मुद्दों का सार प्रस्तुत करती है। किसी व्यक्तिगत मामले का निष्कर्ष सरकारी कर्तव्य के कानूनी आधार और प्रक्रिया तथा कृत्य के समय की परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है।

स्रोत मामले

यह गाइड कोरिया लीगल एड कॉर्पोरेशन के निम्न परामर्श मामलों (कोरियाई में) से AI द्वारा तैयार की गई है।

  1. 임의동행요구에 불응한 경우 공무집행방해죄를 구성하는지
  2. 공장 밖 노조원들에 대한 ‘고착관리’와 현행범체포 후 40분이 지나 체포이유 등을 고지 한 것이 적법한 직무집행인지
  3. 압류물을 다른 장소로 이동시킨 경우 처벌 여부
  4. 허위의 소명자료를 제출하여 등기를 마친 경우 위계에 의한 공무집행방해죄 성립 여부
  5. 압류경합 시 일부채권자에게만 변제 후 압류물 처분한 경우
  6. 현장에서 대기 중이었던 공무원을 ‘직무를 집행하는 공무원’이라고 볼 수 있는지
  7. 맹견으로 집행관의 강제집행을 방해하면 처벌되는지
  8. 불심검문에 불응하여 경찰관들의 멱살을 잡아 밀친 행위가 공무집행방해죄가 성립하는지
  9. 차량 번호판에 ‘파워매직세이퍼’를 뿌려 차량을 운행한 행위에 위계에 의한 공무집행방해죄가 성립하는지
  10. 음주측정을 위한 혈액을 바꿔치기하여 제출한 경우 위계에 의한 공무집행방해죄 성립여부
  11. 공무집행방해죄에서 공무집행의 적법성을 판단하는 기준 시점은 언제인지
  12. 재소자가 교도관과 공모하여 담배를 받은 행위가 위계에 의한 공무집행방해죄를 구성하는지
  13. 음향이 공무집행방해죄에서의 폭행에 해당하는지
  14. 건물점유이전금지가처분 집행 후 일부 점유이전 한 경우
  15. 약물검사에 소변을 바꿔치기하여 제출한 경우 위계에 의한 공무집행방해죄 성립 여부
  16. 관리자의 사전 동의 없이 불법체류자 단속 중인 공무원에게 상해를 가한 경우 처벌되는지
  17. 특허권 침해로 인하여 가처분집행이 행하여 졌으나 본안에서 특허권 무효판결이 난 경우 공무상표시무효죄 성립 여부
  18. 미리 뿌려놓은 윤활유나 철판조각에 공무수행중인 공무원이 다친 경우 특수공무집행방해치상죄가 성립하는지 여부
  19. 벌금미납으로 지명수배된 자가 임의동행을 거부하는 경우 공무집행방해죄를 구성하는지
  20. 가압류결정 송달받고 채무자에게 가압류된 돈을 지급한 경우
  21. 공무원이 결재권자에 대하여 허위내용의 결재를 받은 경우 처벌되는지
  22. 공사중지가처분 집행 후 건축허가명의 변경하여 공사한 경우
  23. 즉결심판청구를 하지 않고 계속하여 운전면허증의 제시를 요구한 것이 적법한 직무행위인지
  24. 도로의 보도에서 천막설치를 제지하는 공무원에게 가한 폭행이 공무집행방해에 해당하는지
  25. 출입금지가처분명령에 위반한 경우의 형사책임

यह कोरियाई क़ानून की सामान्य जानकारी है, आपके मामले के लिए क़ानूनी सलाह नहीं। किसी विशेष मामले के लिए वकील या कोरिया लीगल एड कॉर्पोरेशन (कोरिया में 132) से संपर्क करें।