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अन्य संवैधानिक मुद्दों और संवैधानिक न्यायनिर्णयन प्रक्रिया की मार्गदर्शिका

10 परामर्श मामलों पर आधारित · अपडेट · कोरियाई मूल से अनुवादित।

इसमें असंवैधानिकता के निर्णय के बाद पुनर्विचारण और आपराधिक मुआवज़े, अधिकार-विवाद न्यायनिर्णयन के पक्षकारों और समय-सीमाओं, तथा राजनीतिक दल को भंग करने और महाभियोग सहित संवैधानिक न्यायनिर्णयन प्रक्रियाओं की मूल बातें दी गई हैं। हर प्रक्रिया में अनुरोध करने के पात्र पक्ष और आवश्यक शर्तें अलग होती हैं, इसलिए संबंधित मुद्दों को अलग-अलग समझना चाहिए।

एक नज़र में

संबंधित पक्ष → दोषसिद्ध व्यक्ति → सरकारी संस्था या स्थानीय सरकार → सरकार या राष्ट्रीय सभा → संवैधानिक मुद्दा सामने आया कौन-सी प्रक्रिया लागू हो सकती है → क्या दंडात्मक प्रावधान असंवैधानिक घोषित हुआ? → हाँ अनुच्छेद 47(4) → नहीं → क्या दोषसिद्धि का निर्णय अंतिम हो चुका है? → हाँ → क्या अनुरोधकर्ता संस्था है और समय-सीमाएँ पूरी हैं? → हाँ अनुच्छेद 63(1) और (2) → संबंधित शर्तें पूरी हों तो अनुरोध संभव हो सकता है → शर्तें पूरी न हों तो यह अनुरोध उपलब्ध नहीं → दोषसिद्धि कब अंतिम हुई जाँचें → बरी होने पर हिरासत का मुआवज़ा जाँचें → दल-विघटन और महाभियोग की प्रक्रिया जाँचें → पहले संवैधानिकता निर्णय के अगले दिन या उसके बाद दोषसिद्धि अंतिम हुई या नहीं → पुनर्विचारण में बरी होने पर हिरासत अवधि के लिए मुआवज़ा माँगा जा सकता है → दल-विघटन सरकार माँगती है महाभियोग प्रस्ताव राष्ट्रीय सभा पारित करती है फैसला संवैधानिक न्यायालय करता है

मुख्य बातें

  • असंवैधानिक घोषित किए गए दंडात्मक कानून के प्रावधान सामान्यतः पूर्वव्यापी रूप से प्रभावहीन हो जाते हैं; यदि पहले संवैधानिकता का निर्णय हुआ था, तो वे उस निर्णय के अगले दिन से पूर्वव्यापी रूप से प्रभावहीन हो जाते हैं (संवैधानिक न्यायालय अधिनियम, अनुच्छेद 47(3) (헌법재판소법 제47조 제3항))।
  • असंवैधानिक घोषित किए गए दंडात्मक प्रावधान के आधार पर दोषसिद्धि का निर्णय अंतिम हो चुका हो, तो पुनर्विचारण का अनुरोध किया जा सकता है (संवैधानिक न्यायालय अधिनियम, अनुच्छेद 47(4) (헌법재판소법 제47조 제4항))।
  • यदि दोषसिद्धि का निर्णय पहले के संवैधानिकता संबंधी निर्णय के अगले दिन या उसके बाद अंतिम हुआ, तो अपराध उस निर्णय से पहले किया गया हो, तब भी मामला पुनर्विचारण के दायरे में आ सकता है (सर्वोच्च न्यायालय, 10 नवंबर 2016 का निर्णय, 2015मो1475)।
  • यदि पुनर्विचारण में बरी करने का निर्णय दिया गया हो, तो हिरासत की अवधि के लिए आपराधिक मुआवज़े का अनुरोध किया जा सकता है (आपराधिक मुआवज़े और मान-प्रतिष्ठा की बहाली संबंधी अधिनियम, अनुच्छेद 5(1) (형사보상 및 명예회복에 관한 법률 제5조 제1항))।
  • अधिकार-विवाद न्यायनिर्णयन वह प्रक्रिया है जिसमें सरकारी संस्था या स्थानीय सरकार जैसी अधिकार-विवाद की पक्षकार अपने अधिकार का उल्लंघन होने या उल्लंघन का जोखिम होने का दावा करती है; कोई व्यक्ति इसका अनुरोध नहीं कर सकता।
  • अधिकार-विवाद न्यायनिर्णयन का अनुरोध आधार का पता चलने की तारीख से 60 दिनों के भीतर और आधार उत्पन्न होने की तारीख से 180 दिनों के भीतर करना चाहिए (संवैधानिक न्यायालय अधिनियम, अनुच्छेद 63(1), (2) (헌법재판소법 제63조 제1항·제2항))।
  • राजनीतिक दल को भंग करने के निर्णय का अनुरोध सरकार करती है। संवैधानिक न्यायालय यह जांचता है कि दल का उद्देश्य या गतिविधियां लोकतांत्रिक मूल व्यवस्था के विरुद्ध हैं या नहीं (संविधान, अनुच्छेद 8(4) (헌법 제8조 제4항))।
  • राजनीतिक दल को भंग करने के निर्णय के विरुद्ध भी पुनर्विचारण का अनुरोध किया जा सकता है। महाभियोग की प्रक्रिया में राष्ट्रीय सभा महाभियोग प्रस्ताव पारित करती है और उसके बाद संवैधानिक न्यायालय यह तय करता है कि पदाधिकारी को पद से हटाया जाए या नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q. यदि किसी ऐसे कानून के तहत दोषसिद्धि हुई हो जिसे असंवैधानिक घोषित किया गया है, तो क्या पुनर्विचारण का अनुरोध किया जा सकता है?

असंवैधानिक घोषित किए गए दंडात्मक कानून के प्रावधान के आधार पर दोषसिद्धि का अंतिम निर्णय हो चुका हो, तो पुनर्विचारण का अनुरोध किया जा सकता है। हालांकि, जिस प्रावधान को पहले संवैधानिक घोषित किया गया था, वह उस निर्णय के अगले दिन से पूर्वव्यापी रूप से प्रभावहीन हो जाता है; इसलिए अंतिम निर्णय की तारीख पुनर्विचारण की संभावना को प्रभावित कर सकती है।

मामला 1, मामला 2

Q. क्या अपराध पहले के संवैधानिकता संबंधी निर्णय से पहले किया गया हो, तब भी पुनर्विचारण का अनुरोध किया जा सकता है?

मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार, यदि अपराध पहले के संवैधानिकता संबंधी निर्णय से पहले किया गया था, लेकिन दोषसिद्धि का निर्णय उस निर्णय के अगले दिन या उसके बाद अंतिम हुआ, तो पुनर्विचारण का अनुरोध किया जा सकता है। यह तय करते समय कि मामला पुनर्विचारण के दायरे में आता है या नहीं, केवल अपराध किए जाने का समय ही नहीं, बल्कि यह भी देखना होगा कि क्या निर्णय में ऐसे प्रावधान को लागू किया गया था जिसका प्रभाव असंवैधानिकता के निर्णय के कारण पूर्वव्यापी रूप से समाप्त हो गया।

मामला 2

Q. यदि पुनर्विचारण में बरी कर दिया जाए, तो क्या हिरासत की अवधि के लिए मुआवज़ा मिल सकता है?

यदि दोषसिद्धि के निर्णय के कारण हिरासत में रखा गया हो और पुनर्विचारण में बरी कर दिया गया हो, तो आपराधिक मुआवज़े का अनुरोध किया जा सकता है। मामले में बताया गया है कि हिरासत की अवधि के लिए एक निश्चित राशि का मुआवज़ा मिल सकता है, लेकिन मुआवज़े की विशिष्ट राशि नहीं बताई गई है।

मामला 1

Q. क्या कोई व्यक्ति किसी सरकारी संस्था या स्थानीय सरकार के विरुद्ध अधिकार-विवाद न्यायनिर्णयन का अनुरोध कर सकता है?

व्यक्ति अधिकार-विवाद न्यायनिर्णयन में पक्षकार बनने वाली सरकारी संस्था या स्थानीय सरकार नहीं होता, इसलिए वह इसका अनुरोध नहीं कर सकता। यह वह प्रक्रिया है जिसमें कोई सरकारी संस्था या स्थानीय सरकार अपने अधिकार का उल्लंघन होने या उल्लंघन का जोखिम होने का दावा करती है।

मामला 4, मामला 8

Q. क्या शिक्षा अधीक्षक और संबंधित स्थानीय सरकार के बीच अधिकारों के विवाद का समाधान भी अधिकार-विवाद न्यायनिर्णयन से किया जा सकता है?

मामले में संवैधानिक न्यायालय ने शिक्षा अधीक्षक को प्रांत/महानगर की शिक्षा और शैक्षणिक मामलों का कार्यान्वयन करने वाली संस्था माना। उसने यह निर्णय दिया कि शिक्षा अधीक्षक और संबंधित स्थानीय सरकार के बीच का आंतरिक विवाद संवैधानिक न्यायालय के अधिकार-क्षेत्र में आने वाला अधिकार-विवाद न्यायनिर्णयन नहीं है। इसलिए ऐसा अनुरोध प्रक्रिया की दृष्टि से अनुचित मानकर खारिज किया जा सकता है।

मामला 3

Q. अधिकार-विवाद न्यायनिर्णयन का अनुरोध कब तक करना चाहिए?

अनुरोध करने के आधार का पता चलने की तारीख से 60 दिनों के भीतर, और वह आधार उत्पन्न होने की तारीख से 180 दिनों के भीतर अनुरोध करना होगा। मामले में बताया गया है कि इन अवधियों के बाद किया गया अनुरोध खारिज कर दिया जाएगा।

मामला 4

Q. राजनीतिक दल को भंग करने के निर्णय का अनुरोध कौन करता है, और दल भंग होने पर क्या होता है?

यदि किसी राजनीतिक दल का उद्देश्य या गतिविधियां लोकतांत्रिक मूल व्यवस्था के विरुद्ध हों, तो सरकार संवैधानिक न्यायालय से उस दल को भंग करने के निर्णय का अनुरोध कर सकती है। यदि भंग करने का निर्णय दिया जाता है, तो दल का पंजीकरण रद्द कर दिया जाता है। मामले के अनुसार, भंग किए गए दल के प्रतिनिधि और पदाधिकारी ऐसा दल नहीं बना सकते जिसके घोषणापत्र या मूल नीतियां समान या मिलती-जुलती हों, और दल की संपत्ति राज्य के स्वामित्व में चली जाती है।

मामला 5

Q. क्या राजनीतिक दल को भंग करने के निर्णय के विरुद्ध भी पुनर्विचारण का अनुरोध किया जा सकता है?

मामले में संवैधानिक न्यायालय ने निर्णय दिया कि राजनीतिक दल को भंग करने के निर्णय के विरुद्ध भी पुनर्विचारण की अनुमति होनी चाहिए। इसलिए यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि ऐसे निर्णय के विरुद्ध पुनर्विचारण की अनुमति नहीं है।

मामला 9

Q. यदि संवैधानिक शिकायत में हार हो जाए, तो क्या वकील नियुक्त करने का खर्च राज्य वहन करता है?

मामले में संवैधानिक न्यायालय के निर्णय के अनुसार, राज्य द्वारा वहन की जाने वाली संवैधानिक न्यायनिर्णयन की लागत में वकील की फीस जैसे पक्षकार के खर्च शामिल नहीं हैं। इसलिए संवैधानिक शिकायत दायर करने के लिए किए गए वकील नियुक्ति के खर्च का भुगतान राज्य से नहीं कराया जा सकता।

मामला 7

संबंधित क़ानून

  • संविधान, अनुच्छेद 8(4) (헌법 제8조 제4항)
  • संविधान, अनुच्छेद 65(1), (3), (4) (헌법 제65조 제1항·제3항·제4항)
  • संविधान, अनुच्छेद 111(1)(4) (헌법 제111조 제1항 제4호)
  • संविधान, अनुच्छेद 113(1) (헌법 제113조 제1항)
  • संविधान, अनुच्छेद 117(2) (헌법 제117조 제2항)
  • संवैधानिक न्यायालय अधिनियम, अनुच्छेद 23(2) (헌법재판소법 제23조 제2항)
  • संवैधानिक न्यायालय अधिनियम, अनुच्छेद 47(3), (4) (헌법재판소법 제47조 제3항·제4항)
  • संवैधानिक न्यायालय अधिनियम, अनुच्छेद 54(2) (헌법재판소법 제54조 제2항)
  • संवैधानिक न्यायालय अधिनियम, अनुच्छेद 55 (헌법재판소법 제55조)
  • संवैधानिक न्यायालय अधिनियम, अनुच्छेद 62(1)(3) (헌법재판소법 제62조 제1항 제3호)
  • संवैधानिक न्यायालय अधिनियम, अनुच्छेद 63(1), (2) (헌법재판소법 제63조 제1항·제2항)
  • संवैधानिक न्यायालय अधिनियम, अनुच्छेद 66(2) (헌법재판소법 제66조 제2항)
  • संवैधानिक न्यायालय अधिनियम, अनुच्छेद 67(2) (헌법재판소법 제67조 제2항)
  • आपराधिक मुआवज़े और मान-प्रतिष्ठा की बहाली संबंधी अधिनियम, अनुच्छेद 5(1) (형사보상 및 명예회복에 관한 법률 제5조 제1항)
  • स्थानीय शिक्षा स्वशासन अधिनियम (지방교육자치에 관한 법률)

ध्यान दें

  • असंवैधानिकता के निर्णय के बाद पुनर्विचारण की संभावना तय करते समय यह भी जांचें कि पहले संवैधानिकता का निर्णय हुआ था या नहीं, और क्या दोषसिद्धि का निर्णय उस निर्णय के अगले दिन या उसके बाद अंतिम हुआ था।
  • अधिकार-विवाद न्यायनिर्णयन का अनुरोध करने वाले पक्ष सीमित हैं। अनुरोध के लिए दोनों समय-सीमाओं का पालन करना आवश्यक है: आधार का पता चलने की तारीख से 60 दिन और आधार उत्पन्न होने की तारीख से 180 दिन।
  • राजनीतिक दल को भंग करने की प्रक्रिया और महाभियोग की प्रक्रिया में अनुरोध करने वाले पक्ष और प्रक्रिया अलग हैं। दल को भंग करने की प्रक्रिया सरकार के अनुरोध से, जबकि महाभियोग की प्रक्रिया राष्ट्रीय सभा द्वारा महाभियोग प्रस्ताव पारित करने से शुरू होती है।
  • मामले में बताए गए परिणाम और आवश्यक शर्तें उस परामर्श मामले में दिए गए निर्णय पर आधारित हैं। किसी विशिष्ट मामले में लागू तथ्यों और प्रक्रिया की अलग से जांच करनी चाहिए।

संबंधित लेख

स्रोत मामले

यह गाइड कोरिया लीगल एड कॉर्पोरेशन के निम्न परामर्श मामलों (कोरियाई में) से AI द्वारा तैयार की गई है।

  1. 위헌결정 이후 재심이나 형사보상을 청구할 수 있는지 여부
  2. 위헌으로 결정된 법률 또는 법률의 조항에 근거한 유죄의 확정판결의 재심 청구 범위
  3. 교육감과 해당 지방자치단체 사이의 내부적 분쟁과 관련한 권한쟁의심판청구의 적법 여부
  4. 권한쟁의심판
  5. 정당해산심판제도
  6. 탄핵심판제도
  7. 국가가 부담하는 헌법재판의 심판비용에 변호사강제주의에 따른 변호사보수 등의 당사자비용이 포함되는지 여부
  8. 국민 개인이 대법원장을 상대로 제기한 권한쟁의심판의 가능성
  9. 정당해산결정에 대하여 재심이 허용되는지 여부
  10. 특별검사제도

यह कोरियाई क़ानून की सामान्य जानकारी है, आपके मामले के लिए क़ानूनी सलाह नहीं। किसी विशेष मामले के लिए वकील या कोरिया लीगल एड कॉर्पोरेशन (कोरिया में 132) से संपर्क करें।