किम ही-क्यॉन्ग ने 10 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक लेख में लिखा कि अस्सी वर्ष से काफी अधिक उम्र की उनकी माँ, मैक्युलर डिजनरेशन के कारण दृष्टि खोने और कंधों व कमर में दर्द होने के बावजूद, रोज़मर्रा के दृश्यों के रेखाचित्र बनाने में मग्न रहती हैं। वह इस दृश्य को लेबनानी-अमेरिकी लेखिका राबी अलामेद्दीन के उपन्यास 『불필요한 여자』 की नायिका आलिया की कहानी के साथ रखती हैं। इन दोनों उदाहरणों से यह सवाल उठता है कि जब किसी काम का परिणाम दिखाई न दे, तब भी उसे करते रहने में बिताया गया समय जीवन में क्या छोड़ जाता है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

किम ही-क्यॉन्ग को अपनी माँ के रेखाचित्रों में पूर्णता से अधिक किसी चीज़ में गहरे डूब जाने का रवैया दिखाई देता है। वह आत्मचिंतन करती हैं कि उनमें शुरुआती लोगों की अनगढ़ता को सहन करने का धैर्य कम है और वह प्रक्रिया के बजाय परिणाम पर ध्यान देती हैं। वह अपनी माँ के इस तल्लीन रवैये को प्रशंसनीय और अनमोल बताती हैं। वह किसी खास शौक के लाभ पर ज़ोर नहीं देतीं, बल्कि किसी वस्तु या व्यक्ति में दिलचस्पी लेने और वर्तमान प्रक्रिया को महत्व देने के रवैये पर ज़ोर देती हैं।

उपन्यास की आलिया लेबनान के बेरूत में रहने वाली 72 वर्ष की महिला हैं। सोलह साल की उम्र में उनकी ज़बरन शादी कर दी गई थी और बाद में उनका तलाक हो गया। इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक एक किताबों की दुकान में काम किया। लेख के अनुसार, वह बिना दोस्तों के अकेली रहती हैं और पढ़ने-लिखने के सहारे जीवन बिताती हैं। वह नए साल के पहले दिन अनुवाद शुरू करती हैं और 50 वर्षों में 37 किताबों का अरबी में अनुवाद करती हैं, लेकिन एक भी प्रकाशित नहीं करातीं।

आम सामाजिक मानकों से देखें तो प्रकाशित न हुआ अनुवाद बिना किसी उपलब्धि का काम लग सकता है। लेकिन लेख कहता है कि आलिया अंतिम नतीजे के बजाय अनुवाद की प्रक्रिया के प्रति समर्पित हैं और उस काम को जीवन का अर्थ तथा कठिन वर्षों को सहने का सहारा मानती हैं। आलिया के लिए अनुवाद केवल किसी को दिखाने लायक परिणाम तैयार करना नहीं, बल्कि समय से गुज़रने का एक तरीका भी है।

उपन्यास में ऊपर की मंज़िल का पाइप फटने से आलिया की अनुवादित पांडुलिपियाँ पानी में भीग जाती हैं। तब उसी इमारत में रहने वाली तीन महिलाएँ पांडुलिपियों को सुखाती हैं, उन पर इस्त्री करती हैं और उनकी मदद करती हैं। ये वही पड़ोसी हैं जिनसे आलिया दूरी बनाए रखती थीं और जिन्हें ‘तीन चुड़ैलें’ कहती थीं। पांडुलिपियों को बचाने के दौरान वे किताबों के किरदारों के बारे में बातें करती हैं और हँसती हैं। किम ही-क्यॉन्ग इस दृश्य को ऐसे पढ़ती हैं कि किताबों के किरदारों के साथ आलिया की बातचीत अब लोगों के बीच फैल रही है।

इस खबर का अर्थ

इस लेख में प्रक्रिया के महत्व का अर्थ यह वादा करना नहीं है कि ‘मेहनत करने पर ज़रूर सफलता मिलेगी।’ आलिया के अनुवाद प्रकाशित नहीं हुए और लेख यह भी नहीं बताता कि उनकी माँ के रेखाचित्रों का क्या नतीजा निकलेगा। फिर भी, दोनों गतिविधियाँ अपने आप में अर्थ और तल्लीनता पैदा कर सकती हैं; आलिया के मामले में पड़ोसियों की मदद के चलते वे दूसरों से जुड़ने के अनुभव में भी बदल जाती हैं।

प्रक्रिया में तल्लीन होने का यह अर्थ नहीं कि दुख या अकेलापन मिट जाता है। लेख इस संभावना की ओर ध्यान दिलाता है कि कठिनाइयों के बीच भी कोई गतिविधि जीवन में अर्थ और रिश्ते पैदा कर सकती है।

पांडुलिपियों की देखभाल साथ मिलकर करने वाले लोगों से आमने-सामने मिलने पर आलिया अनुभव करती हैं कि किताबों के ज़रिए विकसित सहानुभूति वास्तविक जीवन के दूसरे लोगों तक भी पहुँच सकती है। किम ही-क्यॉन्ग इस घटना को आलिया के अपने आप को नए सिरे से गढ़ने का अवसर मानती हैं।

उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति ऐसी चित्रकारी जारी रखे जिसका कोई नतीजा न निकला हो, तो भले ही उससे तुरंत कोई तैयार कलाकृति या सराहना न मिले, प्रक्रिया से मिलने वाली तल्लीनता अपने आप में अर्थपूर्ण हो सकती है। उपन्यास का यह दृश्य यह भी दिखाता है कि भले ही आसपास के लोग उस अर्थ को न समझें, ज़रूरत पड़ने पर मिलकर मदद करने से रिश्ता बन सकता है। हालांकि, यह दावा नहीं है कि कोई गतिविधि हर व्यक्ति के लिए एक ही तरह से लाभकारी होती है; यह वह संभावना है जिसे किम ही-क्यॉन्ग ने इन दो उदाहरणों में देखा।

पुष्ट तथ्य और वे बातें जो अभी अज्ञात हैं

पुष्ट तथ्य

  • किम ही-क्यॉन्ग ने 10 अक्टूबर 2026 को अपनी माँ के रेखाचित्रों और प्रक्रिया के प्रति समर्पित रहने के रवैये पर एक लेख प्रकाशित किया।
  • उनकी माँ अस्सी वर्ष से अधिक उम्र की हैं। मैक्युलर डिजनरेशन के कारण उनकी दृष्टि कम होती जा रही है और उनके कंधों व कमर में दर्द है, लेकिन वह रोज़मर्रा के दृश्यों के रेखाचित्र बनाने में मग्न रहती हैं।
  • उपन्यास की आलिया बेरूत में रहने वाली 72 वर्ष की महिला हैं। उन्होंने 50 वर्षों में 37 किताबों का अरबी में अनुवाद किया, लेकिन एक भी प्रकाशित नहीं कराया।
  • ऊपर की मंज़िल का पाइप फटने से पांडुलिपियाँ पानी में भीग गईं, तब तीन पड़ोसी महिलाओं ने उन्हें सुखाया, उन पर इस्त्री की और मदद की।
  • लेख में दी गई पुस्तक-संबंधी जानकारी के अनुसार, किताब राबी अलामेद्दीन ने लिखी, ली दा-ही ने अनुवाद किया और म्यूजिनट्री ने 2026 में प्रकाशित किया।

वे बातें जो अभी अज्ञात हैं

  • लेख में उपन्यास के मूल संस्करण के प्रकाशन का वर्ष और मूल शीर्षक नहीं दिया गया है।
  • किम ही-क्यॉन्ग की माँ ने रेखाचित्र बनाना कब शुरू किया और इसके पीछे क्या खास वजह थी, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
  • आलिया ने अनुवाद का काम किन परिस्थितियों में शुरू किया और वे 37 किताबें कौन-सी हैं, इसकी जानकारी लेख में विस्तार से नहीं दी गई है।

पाठक क्या जाँच सकते हैं

  • अगर आप किताब के मूल संस्करण का प्रकाशन-वर्ष और मूल शीर्षक भी जानना चाहते हैं, तो उपन्यास के कॉपीराइट पृष्ठ या पुस्तक-परिचय सामग्री में प्रकाशन-संबंधी जानकारी देख सकते हैं। लेख में अनुवादक, प्रकाशक और प्रकाशन-वर्ष के रूप में ली दा-ही, म्यूजिनट्री और 2026 दिए गए हैं।
  • अगर आपके आसपास कोई बुज़ुर्ग किसी गतिविधि में मग्न रहता है, तो उसके काम के नतीजे के बारे में पहले पूछने के बजाय यह जानने की कोशिश की जा सकती है कि उसे उसमें क्या अच्छा लगता है और उसे किस तरह की मदद चाहिए। उपन्यास में पड़ोसियों का पांडुलिपियों की देखभाल में साथ देना रिश्ते की शुरुआत का कारण बना।
  • आप इस पर विचार कर सकते हैं कि क्या आप अपने काम को केवल उसके परिणाम के आधार पर आँकते हैं। किम ही-क्यॉन्ग का लेख यह व्याख्या प्रस्तुत करता है कि प्रक्रिया अपने आप में अर्थपूर्ण हो सकती है, लेकिन इसे हर व्यक्ति पर लागू होने वाले सही जवाब के रूप में पेश नहीं करता।