डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति से बातचीत करते समय उसे जल्दी जवाब देने के लिए न कहकर उत्तर की प्रतीक्षा करना और ऐसा माहौल बनाना मददगार हो सकता है जिसमें बातचीत पर ध्यान देना आसान हो। डिमेंशिया कई मस्तिष्क रोगों के लिए इस्तेमाल होने वाला एक व्यापक शब्द है, जो याददाश्त के साथ-साथ भाषा और संवाद को भी प्रभावित कर सकते हैं। कुछ प्रकार के डिमेंशिया शब्दों का अर्थ समझने या भाषा के ज़रिये अपनी बात कहने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। सही शब्द खोजने या जानकारी समझने में भी अधिक समय लग सकता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति को बातचीत का सिलसिला बनाए रखने या यह याद रखने में मुश्किल हो सकती है कि वह क्या कहना चाहता था। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बातचीत का एक ही तरीका हर व्यक्ति के लिए कारगर होगा। डिमेंशिया हर व्यक्ति को अलग तरह से प्रभावित करता है, इसलिए पहले से यह तय न करना अहम है कि सामने वाला क्या समझ सकता है।
बातचीत का बुनियादी नियम है स्पष्ट रूप से बोलना और सम्मान दिखाना। ज़रूरत के अनुसार बात को सरल शब्दों में कहें, लेकिन सामने वाले से कमतर समझकर बात न करें। इससे यह अनुभव बनाए रखने में भी मदद मिलती है कि उन्हें बातचीत से बाहर नहीं रखा जा रहा और एक व्यक्ति के रूप में उनका सम्मान किया जा रहा है।
आसपास के माहौल पर भी ध्यान दिया जा सकता है। शोरगुल वाली जगह पर बातचीत पर ध्यान देना और मुश्किल हो सकता है, इसलिए मुमकिन हो तो शांत जगह चुनें और बातचीत में लोगों की संख्या एक या दो तक सीमित रखना मददगार हो सकता है। अगर किसी बड़ी बैठक में हों, तो कोई व्यक्ति उनके पास रहकर यह देख सकता है कि वे असहज तो महसूस नहीं कर रहे।
इस खबर का मतलब
परिवार और परिचितों के लिए बातचीत की गति और माहौल में बदलाव करना एक व्यावहारिक शुरुआत हो सकती है। सामने वाले के वाक्य पूरा करने से पहले उसकी ओर से बात पूरी करने या जवाब के लिए दबाव डालने के बजाय, धीरे बोलें और उन्हें जवाब देने का समय दें। यह सुनिश्चित करना भी बातचीत में मददगार हो सकता है कि रोशनी पर्याप्त हो ताकि सामने वाला वक्ता को देख सके। अगर वे श्रवण यंत्र या देखने में मदद करने वाले उपकरण का इस्तेमाल करते हैं, तो यह भी जाँचें कि उन्होंने उन्हें पहना है और वे काम कर रहे हैं।
जब बातचीत का तालमेल बिगड़ जाए, तो सामने वाले की बात को तुरंत तथ्यात्मक रूप से सुधारने के बजाय उनकी भावनाओं पर ध्यान देने का सुझाव दिया जाता है। अगर डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति अतीत के किसी व्यक्ति या घटना के बारे में ऐसे बात करे मानो वह अभी हो रही हो, तो यह जानने की कोशिश करें कि क्या उस बात से उन्हें परेशानी हो रही है। फिर उन्हें दिलासा दें या बातचीत को किसी दूसरे विषय की ओर मोड़ें। यह भी ध्यान रखें कि जहाँ तक हो सके, झूठ बोलने से बचना चाहिए।
उदाहरण के लिए, अगर बातचीत के दौरान सामने वाला तुरंत जवाब न दे, तो उसकी ओर से बात पूरी करने के बजाय थोड़ी देर प्रतीक्षा करें। अगर आसपास बहुत शोर हो, तो बातचीत जारी रखने के लिए किसी शांत जगह पर जा सकते हैं। इसे हर परिस्थिति में लागू होने वाले सही जवाब के बजाय एक ऐसे बदलाव के रूप में देखा जाना चाहिए जिसे सामने वाले की प्रतिक्रिया पर ध्यान देते हुए आज़माया जा सकता है।
अतीत की यादें साझा करना बातचीत को आनंददायक बना सकता है, लेकिन अतीत के हर अनुभव या पारिवारिक रिश्ते की याद सुखद नहीं होती। अगर आपको पता है कि कोई कठिन याद जुड़ी हुई है, तो देखभाल में शामिल लोगों को इस बारे में बताएँ, ताकि वे परेशानी के संकेतों पर ध्यान दे सकें। साथ में संगीत सुनना या कला और बागवानी जैसी ऐसी गतिविधियाँ करना, जिनमें बातचीत का दबाव कम हो, दूसरे विकल्पों के रूप में सुझाया गया है।
पुष्ट तथ्य और जो अभी अज्ञात है
पुष्ट तथ्य
- डिमेंशिया कई मस्तिष्क रोगों के लिए इस्तेमाल होने वाला एक व्यापक शब्द है, जो याददाश्त, भाषा और संवाद को प्रभावित कर सकते हैं।
- डिमेंशिया के कुछ प्रकार शब्दों का अर्थ समझने या भाषा के ज़रिये अपनी बात कहने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।
- डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति को शब्द खोजने में मुश्किल हो सकती है या जानकारी समझने में अधिक समय लग सकता है।
- शांत जगह, बातचीत में लोगों की संख्या एक या दो तक सीमित रखना, पर्याप्त रोशनी और सहायक उपकरणों की जाँच करना संवाद में मददगार हो सकता है।
- अचानक भ्रम, मतिभ्रम या मनोदशा में बदलाव डिलीरियम के संकेत हो सकते हैं और डिलीरियम एक चिकित्सकीय आपातस्थिति है।
जो अभी अज्ञात है
- डिमेंशिया के प्रकार या उसकी प्रगति के चरण के अनुसार बातचीत का तरीका विशेष रूप से कैसे बदलना चाहिए, यह नहीं बताया गया है।
- अचानक बदलाव दिखने पर किससे और किस तरह मदद माँगनी चाहिए, यह भी विस्तार से नहीं बताया गया है।
पाठक किन बातों की जाँच करें
- बातचीत से पहले आसपास के शोर और रोशनी पर ध्यान दें। यह भी जाँचें कि सामने वाले ने अपना श्रवण यंत्र या देखने में मदद करने वाला उपकरण पहना है और वह काम कर रहा है।
- सामने वाले के अपनी बात पूरी करने तक प्रतीक्षा करें और उनके हाव-भाव या प्रतिक्रिया पर ध्यान देते हुए बातचीत की गति और विषय में बदलाव करें। अतीत की बातें साझा करते समय यह भी सोचें कि क्या वे यादें उनके लिए सहज हैं।
- अगर अचानक भ्रम, मतिभ्रम या मनोदशा में बदलाव दिखे, तो इसे केवल डिमेंशिया के सामान्य लक्षण न मानें। संक्रमण या हाल में दवा में हुए बदलाव की जाँच करें और मदद लें। याद रखें कि डिलीरियम एक चिकित्सकीय आपातस्थिति है।




















