इस साल जनवरी से अगस्त तक पुलिस ने अभियोजन पक्ष के पास 26,961 गिरफ्तारी वारंट आवेदन भेजे, जिनमें से 9,186 खारिज कर दिए गए। सर्वोच्च अभियोजन कार्यालय (대검찰청) के आंकड़ों का हवाला देने वाली खबर के अनुसार, खारिज होने की दर 34.1% थी। पुलिस के गिरफ्तारी वारंट आवेदनों को अभियोजन पक्ष द्वारा खारिज किए जाने की दर इस साल पहली बार 30% से ऊपर गई।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

खबर के अनुसार, खारिज होने की दर 2021 में 22.8% दर्ज हुई थी और इसके बाद बढ़कर 2025 में 26.8% हो गई। इस साल जनवरी से अगस्त का आंकड़ा इस बढ़ोतरी से भी अधिक है। हालांकि, आंकड़ों की अवधि और वर्ष अलग-अलग हैं, इसलिए केवल इनके आधार पर यह नहीं बताया जा सकता कि सालाना रुझान आखिर किस स्तर पर जाकर रुकेगा।

यह बदलाव अभियोजन व्यवस्था में सुधार के साथ जुड़ा है। खबर में बताया गया कि पिछले शुक्रवार को दक्षिण कोरिया ने 78 साल बाद अभियोजन कार्यालय (검찰청) को समाप्त कर दिया और दो संस्थाएँ शुरू कीं, जिनमें जांच और अभियोजन के अधिकार (मामले को मुकदमे के लिए भेजने का निर्णय लेने का अधिकार) बांटे गए हैं। यह सुधार अभियोजन पक्ष द्वारा जरूरत से ज्यादा अधिकारों का इस्तेमाल किए जाने की लंबे समय से चली आ रही आलोचना के बीच हुआ।

पुलिस जांचकर्ताओं ने शिकायत की कि सुधार की प्रक्रिया में अभियोजन पक्ष से जांच का अधिकार छीन लिए जाने के बाद, वह पुलिस के अनुरोध पर वारंट मांगने में संकोच कर रहा है। यह पुलिस जांचकर्ताओं की ओर से उठाई गई आपत्ति है; उपलब्ध आंकड़े यह साबित नहीं करते कि अभियोजन पक्ष के रवैये में बदलाव आया है या सुधार के कारण खारिज होने की दर बढ़ी है।

इस खबर का अर्थ

गिरफ्तारी वारंट के आवेदन और उन्हें खारिज किया जाना, जांच एजेंसियों के बीच निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़े आंकड़े हैं। केवल खारिज होने की दर बढ़ने से यह पता नहीं चलता कि किसी खास मामले में हिरासत जरूरी थी या अभियोजन पक्ष का फैसला उचित था। खारिज किए जाने के कारण उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, इसलिए खारिज हुए मामलों की संख्या भर से यह तय करना भी मुश्किल है कि जांच में कोई समस्या थी या अभियोजन पक्ष वारंट मांगने से हिचक रहा था।

ये आंकड़े इस ओर ध्यान खींच सकते हैं कि पुलिस के वारंट आवेदनों पर अभियोजन पक्ष के स्तर पर किस तरह कार्रवाई होती है। साथ ही, चूंकि ये आंकड़े जांच और अभियोजन के अधिकार अलग करने वाले सुधार के दौरान के हैं, इसलिए आगे यह देखना जरूरी होगा कि अधिकारों की नई व्यवस्था का वारंट मांगने की प्रथा पर क्या असर पड़ता है। हालांकि, मौजूदा आंकड़े सुधार से पहले और बाद की सीधी तुलना नहीं करते और न ही कारण-परिणाम संबंध साबित करते हैं।

उदाहरण के लिए, हिरासत में लिए गए किसी परिजन वाले व्यक्ति को केवल इसलिए यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि उसका मामला भी जल्द रिहाई तक पहुंच जाएगा क्योंकि कुल खारिज दर ऊंची है। रिहाई का फैसला हर मामले के लिए अदालत द्वारा अलग प्रक्रिया और परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है।

संबंधित व्यवस्था और सहायता संबंधी जानकारी

आंतरिक कानूनी मार्गदर्शिका के अनुसार, जांच के दौरान हिरासत में लिए गए संदिग्ध और कानूनन आवेदन करने के हकदार लोग अदालत से हिरासत की न्यायिक समीक्षा (구속적부심사) का अनुरोध कर सकते हैं—यह वह प्रक्रिया है जिसमें अदालत दोबारा जांचती है कि हिरासत उचित है या नहीं। आवेदन करने के हकदार लोगों में संदिग्ध का वकील, कानूनी प्रतिनिधि, पति या पत्नी, सीधे वंशज या पूर्वज, भाई-बहन, परिवार का सदस्य, साथ रहने वाला व्यक्ति या नियोक्ता शामिल हैं। आवेदन में संदिग्ध और आवेदक की जानकारी, हिरासत की तारीख, अनुरोध का उद्देश्य और कारण आदि लिखे जा सकते हैं। इसके साथ पारिवारिक संबंध के दस्तावेज या समझौता-पत्र जैसे अनुकूल दस्तावेज भी लगाए जा सकते हैं।

आरोप तय होने के बाद संदिग्ध नहीं, बल्कि प्रतिवादी जमानत (보석) के लिए आवेदन कर सकता है। प्रतिवादी के अलावा उसका वकील, पति या पत्नी, रिश्तेदार, परिवार का सदस्य, साथ रहने वाला व्यक्ति या नियोक्ता भी आवेदन कर सकते हैं। जमानत की मंजूरी और शर्तों का फैसला अदालत ठोस परिस्थितियों के आधार पर करती है। जमानत राशि जमा करने के अलावा, अदालत में उपस्थित होने का वचन या निवास पर पाबंदी जैसी शर्तें भी लगाई जा सकती हैं। उचित कारण के बिना सुनवाई में उपस्थित न होने या शर्तों का उल्लंघन करने पर जमानत रद्द की जा सकती है या जमानत राशि का पूरा अथवा कुछ हिस्सा जब्त किया जा सकता है।

हिरासत की न्यायिक समीक्षा जांच के चरण में संदिग्ध पर लागू होती है, जबकि जमानत आरोपित प्रतिवादी पर लागू होती है। अभियोजन के स्तर पर गिरफ्तारी वारंट खारिज होने के आंकड़ों और पहले से हिरासत में लिए गए व्यक्ति द्वारा अदालत से रिहाई मांगने की प्रक्रिया को अलग-अलग समझना चाहिए।

पुष्ट तथ्य और वे बातें जो अभी ज्ञात नहीं हैं

पुष्ट तथ्य

  • इस साल जनवरी से अगस्त तक पुलिस ने अभियोजन पक्ष के पास 26,961 गिरफ्तारी वारंट आवेदन भेजे।
  • अभियोजन पक्ष ने इनमें से 9,186 आवेदन खारिज किए; खारिज होने की दर 34.1% थी।
  • पुलिस के गिरफ्तारी वारंट आवेदनों को अभियोजन पक्ष द्वारा खारिज किए जाने की दर इस साल पहली बार 30% से ऊपर गई।
  • खबर के अनुसार, खारिज होने की दर 2021 के 22.8% से बढ़कर 2025 में 26.8% हो गई।
  • पुलिस जांचकर्ताओं ने शिकायत की कि अभियोजन सुधार के बाद वारंट मांगने में संकोच किया जा रहा है।

वे बातें जो अभी ज्ञात नहीं हैं

  • अभियोजन पक्ष ने पुलिस के गिरफ्तारी वारंट आवेदनों को किन ठोस कारणों से खारिज किया?
  • खबर में आगे दिए जाने वाले पुलिस के अनुरोधों से संबंधित खारिज दर के अन्य आंकड़े क्या थे?
  • अभियोजन सुधार का खारिज होने की दर में बदलाव पर वास्तव में कितना असर पड़ा?

पाठकों को क्या जांचना चाहिए

  • यदि कोई संदिग्ध या उसका परिवार का सदस्य हिरासत में है, तो वे हिरासत की न्यायिक समीक्षा के लिए आवेदन करने की पात्रता और जमा किए जाने वाले विवरण व दस्तावेजों की जांच कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर वकील से सलाह ले सकते हैं।
  • यदि पहले से आरोपित प्रतिवादी की रिहाई पर विचार किया जा रहा है, तो जमानत के लिए आवेदन करने की पात्रता, अदालत द्वारा लगाई जा सकने वाली शर्तों और पेशी में उपस्थित होने के दायित्व की जांच करनी चाहिए।
  • जमानत मंजूर होगी या नहीं और उसकी शर्तें क्या होंगी, यह हर मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है; इसलिए कुल खारिज दर को अपने मामले के नतीजे पर सीधे लागू नहीं करना चाहिए।

संदर्भ

  • संदर्भित अन्य रिपोर्ट: en.yna.co.kr